Bihar Board Class 10 Science Model Paper 2026 Set – 1
बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा 2026 विज्ञान मॉडल सेट – 1 में लघु उत्तरीय और दीर्घ उत्तरीय प्रश्न का आंसर के साथ अच्छे से डिस्कशन किया गया है। यदि आप मैट्रिक परीक्षा 2026 में विज्ञान में अच्छा स्कोर करना चाहते हैं तो इस पोस्ट में दिए गए सभी लघु उत्तरीय और दीर्घ उत्तरीय प्रश्न को अच्छे से कमांड कर लीजिए। गारंटी है आपके फाइनल बोर्ड परीक्षा 2026 में सभी प्रश्न यहीं से आएंगे।
| Subject | Science ( Model Paper ) |
|---|---|
| Class | 10th |
| Model Set | 1 |
| Session | 2025-26 |
| Subjective Question | All Most VVI Questions |
Physics – भौतिकी | Model Set – 1 | Class 10 | By-Suraj Sir
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न संख्या 1 से 8 तक लघु उत्तरीय प्रश्न है। इनमें से किन्ही चार प्रश्नों का उत्तर दें। प्रत्येक के लिए दो अंक निर्धारित है।
1. अवतल दर्पण एवं उत्तल दर्पण में अंतर स्पष्ट करें।
Ans- अवतल दर्पण एवं उत्तल दर्पण में निम्नलिखित अंतर है-
अवतल दर्पण
(i) एक प्रकार का गोलीय दर्पण जिसका उभरा हुआ भाग पॉलिश किया हुआ रहता है।
(ii) इसमें प्रतिबिंब बनता है। प्रायः वास्तविक
(iii) इसका उपयोग टार्च, गाड़ी के हेडलाइट में परावर्तक के रूप में होता है।
उत्तल दर्पण
(i) एक प्रकार का गोलीय दर्पण जिसका भीतरी भाग पॉलिश किया हुआ रहता है।
(ii) इसमें हमेशा काल्पनिक एवं छोटा प्रतिबिंब बनता है।
(iii) इसका उपयोग साइड मिरर के रूप में गाड़ी चालक के बगल में होता है।
2. अवतल दर्पण में फोकस दूरी और वक्रता त्रिज्या में क्या संबंध है ?
Ans- अवतल दर्पण में फोकस दूरी f तथा वक्रता त्रिज्या r हो तो f = r/2 अर्थात् फोकस दूरी, वक्रता त्रिज्या की आधी होती है।
3. अमीटर और वोल्टमीटर को विद्युत परिपथ के साथ क्रमशः श्रेणी क्रम एवं समांतर क्रम में क्यों जोड़ा जाता है
Ans- ऐमीटर का प्रतिरोध बहुत ही कम होता है; अतः इसे श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है, जबकि वोल्टमीटर का प्रतिरोध बहुत ही अधिक होता है; अतः इसे समांतरक्रम में जोड़ा जाता है।
- परिपथ में ऐमीटर, विद्युत धारा तथा वोल्टमीटर, विभवांतर मापता है।
4. जीवाश्म ईंधन की क्या हानि है ?
Ans- जीवाश्म ईंधन की निम्नलिखित हानियाँ है-
(i) इसके भंडार सीमित हैं।
(ii) इसके प्रयोग से प्रदूषण बहुत अधिक होता है।
(iii) इसके बनने की दर बहुत कम है।
5. उत्तल लेंस के वक्रता केंद्र पर रखे बिम्ब के प्रतिबिंब के लिए एक किरण आरेख खींचे और उसे प्रतिबिंब की प्रकृति , आकार एवं स्थान को लिखें।
Ans- उत्तल लेस के वक्रता केन्द्र पर रखे बिंब के प्रतिबिंब के लिए एक किरण आरेख –

6. भू संपर्क तार क्या है ? इसका क्या कार्य है ?
Ans- भू-संपर्क तार को अर्थ तार भी कहते हैं। भू-संपर्क तार का संपर्क मेन फ्यूज से रहता है। फ्यूज होकर विद्युत उपकरणों तक पहुँचाया जाता है तथा वह वापस फ्यूज तक संपर्कित रहता है। इसका मुख्य कार्य झटका से बचाने का होता है।
7. विद्युत धारा क्या है ? विद्युत धारा का SI मात्रक लिखें।
Ans- प्रतिरोधकों को परस्पर संयोजित करना प्रतिरोध का संयोजन कहलाता है।
- यह दो प्रकार से होता है-
(i) श्रेणीक्रम संयोजन –

(ii) पार्श्वक्रम संयोजन –

8. हम वाहनों में उत्तल दर्पण को पश्च दृश्य दर्पण के रूप में वरीयता क्यों देते हैं ?
Ans- उत्तल दर्पणों का उपयोग सामान्यतः वाहनों के पश्च-दृश्य दर्पणों के रूप में करते हैं। इनमें ड्राइवर अपने पीछे के वाहनों को देख सकते हैं। जिससे वे सुरक्षित रूप से वाहन चला सके। उत्तल दर्पणों को इसलिए मे प्राथमिकता देते है, क्योंकि ये सदैव सीधा, प्रतिबिंब बनाते हैं लेकिन य छोटा होता है। इनका दृष्टि क्षेत्र भी बहुत अधिक है क्योंकि ये बाहर की वक्रित होते हैं। समतल दर्पण की तुलना में उत्तल दर्पण ड्राइवर को अपने पीछे के बहुत बड़े क्षेत्र को देखने में समर्थ बनाते हैं। इसलिए वे बेहतर है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न संख्या 9 एवं 10 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न है। इनमें से किन्ही एक का उत्तर दें।
9. विद्युत शक्ति क्या है ? निगमन करें H=I² Rt जहां H , किसी प्रतिरोध R में विद्युत धारा I द्वारा t समय में उत्पन ऊष्मा की मात्रा है।
Ans- किसी परिपथ में उपकरणों या प्रतिरोधकों द्वारा उपभुक्त ऊर्जा की दर के विद्युत शक्ति कहते हैं। इसे P द्वारा सूचित किया जाता है।
- इसका S.I. मात्रक वाट होता है।

मान लिया कि R प्रतिरोध के प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवांतर V है जिसके कारण उसमें I धारा प्रवाहित होती है।
अतः V = IR
यदि Q आवेश t समय में प्रतिरोधक के एक सिरे से दूसरे सिरे तक जाता हो, तो आवेश के स्थैतिक ऊर्जा में कमी U = QV
परंतु, Q = It
अतः, U = (It)(IR) = I²Rt
आवेश की स्थैतिक ऊर्जा में यह कमी प्रतिरोधक में ऊष्मा के रूप में प्रकट होती है। अतः प्रतिरोधक में उत्पन्न ऊष्मा H = I² Rt
10. दृष्टि दोष क्या है ? यह कितने प्रकार के होते हैं। किसी एक दृष्टि दोष के निवारण का सचित्र वर्णन करें।
Ans- दृष्टिदोष: जिन व्यक्तियों के नेत्र में प्रतिबिम्ब रेटिना पर नहीं बनता है।उनके लिए कहा जाता है कि उन्हें दृष्टिदोष है।
दृष्टिदोष निम्नलिखित होते है-
- (i) निकट दृष्टिदोष
- (ii) दूर-दृष्टिदोष
- (iii) अंबिंदुकता
- (iv) जरा-दूरदर्शिता
निकट दृष्टि-दोष : इस दोष में नजदीक की चीजें स्पष्ट परंतु दूर की चीजें धूमिल दिखाई पड़ती हैं। यह दृष्टि-दोष नेत्र गोलक की लंबाई में वृद्धि होने से या नेत्र लेंस की सामान्य फोकस दूरी घट जाने के कारण होता है। इस कारण दूर से चली किरणें नेत्र लेंस से आवर्तित होने के पश्चात् रेटिना के पहले ही कट जाती हैं। इससे दूर स्थित वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना पर न बनकर रेटिना के पहले ही बन जाता है।
- इस दोष को दूर करने के लिए नेत्र के दूर-बिंदु के बराबर फोकस-दूरी वाला अवतल लेंस का चश्मा का व्यवहार किया जाता है।

Chemistry – रसायन विज्ञान | Model Set – 1 | Class 10 | By-Suraj Sir
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न संख्या 11 से 17 तक लघु उत्तरीय प्रश्न है। इनमें से किन्ही चार प्रश्नों का उत्तर दें। प्रत्येक के लिए दो अंक निर्धारित है।
11. वियोजन अभिक्रिया एवं संयोजन अभिक्रिया के लिए एक-एक समीकरण लिखिए।
Ans-
- वियोजन अभिक्रिया – CaCO3 → CaO + CO₂
- संयोजन अभिक्रिया – H2 + Cl2 → 2HCI
12. बेंजीन और साइक्लोहेक्साने की संरचना कीजिए।
- बेंजीन (C6 H6 )

- साइक्लोहेक्सेन (C6 H12 )

13. मिश्र धातु क्या है ? मिश्रधातु के दो उदाहरण दें।
Ans- दो या दो से अधिक धातुओं अथवा धातु एवं अधातु के समांग मिश्रण को मिश्रधातु कहते हैं।
- दो मिश्र धातुएँ निम्न है-
(i) पीतल – यह ताँबा एवं जस्ता की मिश्रधातु है।
(ii) काँसा – यह ताँबा एवं टिन की मिश्रधातु है।
14. धातु के साथ अम्ल की अभिक्रिया होने पर सामान्यतः कौन सी गैस निकलती है। एक उदाहरण के साथ समझाइए।
Ans- धातु के साथ अम्ल की अभिक्रिया होने पर सामान्यतः हाइड्रोजन गैस (H₂) गैस निकलती है।
जैसें – Zn + H₂SO₄ → ZnSO4 + H₂(↑)
15. एनोडीकरण क्या है ?
Ans- एनोडीकरण एक विद्युत अपघटनीय विधि है जिसका इस्तेमाल एल्मुनियम एवं मिश्रधातु पर मोटे परत लगाने के लिए किया जाता है ताकि दिए हुए धातु पर जंग ना लग सके। इससे वह (धातु) ज्यादा दिन तक टिकता है।
16. ब्रोमोंप्रोपने एवं प्रोपानोने का संरचना सूत्र लिखिए।
- ब्रोमोप्रोपेन का संरचना सूत्र (C³H⁷Br) एवं
- प्रोपेनोन का संरचना सूत्र (C⁶H⁶O)
17. खनिज पदार्थ एवं अयस्कों के बीच दो अंतर को लिखें।
Ans- खनिज एवं अयस्क में निम्नलिखित अंतर इस प्रकार हैं-
खनिज—
(i) भूपर्पटी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले तत्त्वों या यौगिकों को खनिज कहते हैं।
(ii) सभी खनिजों में धातु की मात्रा एक समान नहीं होती है।
अयस्क—
(i) वे खनिज जिसमें धातुएँ आसानी से तथा कम खर्च में प्राप्त की जा सकती है, अयस्क कहलाते हैं।
(ii) सभी अयस्कों में धातु की प्रतिशत मात्रा पर्याप्त होती है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न संख्या 18 एवं 19 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न है। इनमें से किन्ही एक का उत्तर दें।
18. साबुनीकरण क्या है ? यह एस्टरीकरण से किस प्रकार भिन्न है ?
Ans- एस्टर अम्ल या क्षारक की उपस्थिति में अभिक्रिया करके पुनः कार्बोक्सलिक अम्ल एवं ऐल्कोहॉल बनाता है। इस अभिक्रिया को साबुनीकरण कहते हैं। इस क्रिया का उपयोग साबुन बनाने में किया जाता है।

यह (साबुनीकरण) एस्टीकरण का उल्टा होता है, यही कारण है कि यह एक-दूसरे भिन्न है। अतः हम एस्टीकरण को समीकरण से दिखा सकते हैं, कार्बोक्सलिक अम्ल एवं ऐल्कोहॉल की अभिक्रिया से एस्टर बनता है। एस्टर बनने की इस क्रिया को एस्टीकरण कहते हैं।
कार्बोक्सलिक अम्ल + परिशुद्ध एल्कोहॉल → एस्टर + जल
जैसे – एथेनॉइक अम्ल किसी अम्ल उत्प्रेरक की उपस्थिति में परिशुद्ध एथेनॉल से अभिक्रिया कर एथिल एथेनोएट (एस्टर) तथा जल बनाते हैं।

19. एल्युमिनियम धातु का निष्कर्ष उसके अयस्क से कैसे किया जाता है ?
Ans- ऐलुमिनियम का एक प्रमुख अयस्क है- बॉक्साइट। यह मुख्य रूप से एल्युमिनियम ऑक्साइड, आयरन ऑक्साइड तथा कुछ अन्य अशुद्धियों से मिलकर बना होता है।
बॉक्साइट अयस्क को रासायनिक पृथक्करण विधि द्वारा सांद्रित कर शुद्ध ऐलुमिनियम ऑक्साइड (AI²O³) प्राप्त किया जाता है। ऐलुमिनियम ऑक्साइड का द्रवणांक उच्च और गलित अवस्था विद्युत का अच्छा चालन नहीं होता है। द्रवणांक को कम करने के लिए और विद्युत का सुचालक बनाने के लिए इसमें क्रायोलाइट और फ्लोरस्पार (CaF²) मिला दिया जाता है। द्रवित मिश्रण का विद्युत अपघटन करने से ऐलुमिनियत धातु कैथोड पर और ऑक्सीजन ऐनोड पर मुक्त होती है।

मिश्रण में उपस्थित क्रायोलाइट और फ्लोस्पार अपरिवर्तित रहता है। ऐलुमिनियम आयन ( Al³+) कैथोड से इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर ऐलुमिनियम परमाणु के रूप में मुक्त होते हैं और ऑक्साइड आयन ( 0²–) ऐनोड को इलेक्ट्रॉन देकर ऑक्सीजन गैस के रूप में मुक्त होते हैं।
Biology – जीवविज्ञान | Model Set – 1 | Class 10 | By-Suraj Sir
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न संख्या 20 से 28 तक लघु उत्तरीय प्रश्न है। इनमें से किन्ही चार प्रश्नों का उत्तर दें। प्रत्येक के लिए दो अंक निर्धारित है।
20. पित्त रस क्या है ? मनुष्य के पाचन में इसका क्या महत्व है ?
Ans- पित्त रस यकृत द्वारा स्रावित एक गाढ़ा एवं हल्के हरे रंग का क्षारीय द्रव होता है, जो भोजन के पाचन में अहम भूमिका निभाता है।
(i) पित्त रस अमाशय से ग्रहणी में आए अम्लीय काइम की अम्लीयता को नष्ट कर उसे क्षारीय बनाता है ताकि उसपर अग्न्याशयी रस के एंजाइम क्रिया कर सके।
(ii) पित्त रस वसा का पायसीकरण करता है अर्थात् पित्त रस का लवण वसा के बड़े-बड़े कणों को विघटित कर उसे छोटे-छोटे कणों में परिवर्तित कर देता है, ऐसे वसा का पायसीकृत वसा कहते हैं।
21. वायवीय श्वसन और अवायवीय श्वसन में अंतर स्पष्ट करें।
Ans- वायवीय (ऑक्सी) श्वसन एवं अवायवीय (अनॉक्सी) श्वसन में अंतर-
वायवीय श्वसन
(i) यह श्वसन ऑक्सीजन की उपस्थिति में संपन्न होता है।
(ii) यह श्वसन दो चरणों में संपन्न होता है –
(a) प्रथम चरण—(ग्लाइकोलीसिस) कोशिका द्रव्य में संपन्न होता है।
(b) द्वितीय चरण —(केब्स चक्र) माइटोकॉण्ड्रिया में संपन्न होता है।
(iii) ग्लूकोज का पूर्ण ऑक्सीकरण होता है।
(iv) अंतिम उत्पाद के रूप में कार्बन डाइऑक्साइड एवं जल बनते हैं।
(v) ATP के 38 अणु बनते हैं।
अवायवीय श्वसन
(i) यह श्वसन ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में संपन्न होता है।
(ii) श्वसन की संपूर्ण प्रक्रिया कोशिकाद्रव्य में संपन्न होती है। इसमें केब्स चक्र की प्रक्रिया नहीं होती है।
(iii) ग्लूकोज का आंशिक विखंडन * होता है।
(iv) अंतिम उत्पाद के रूप में पौधों में इथेनॉल एवं CO₂ बनते हैं तथाा जंतु कोशिका में लैक्टिक अम्ल बनता है।
(v) ATP के मात्र दो अणु बनते हैं।
22. लसीका क्या है। इसके क्या कार्य हैं ?
Ans- ऊतक कोशिकाओं के बीच स्थित WBC ससि रक्त प्लाज्मा को लसीका (lymph) कहते हैं। लसीका में RBC नहीं पायी जाती है, इसलिए इसका रंग कुछ पीला होता है।
लसीका के कार्य
(i) लसीका शरीर की पोषण प्रक्रिया में भाग लेता है। यह प्रोटीन के बड़े-बड़े अणुओं को ऊतकों से निकालकर रक्त परिसंचरण में लाता है। यह पोषण प्रक्रिया के लिए पचित वसा को भी ले जाता है।
(ii) लसीका, लसीका ग्रंथियों में उपस्थित लसीका कोशिका (लिम्फोसाइट) की सहायता से शरीर ऊतकों से अप्रवाहित रोगाणुओं को मारकर तथा रोग प्रतिकारकों का निर्माण कर शरीर की रक्षा करता है।
(iii) यह जल का अस्थायी संचय भी करता है।
23. वृक्क क्या है ? वृक्क के दो महत्वपूर्ण कार्यों का उल्लेख करें।
Ans- वृक्क शरीर का प्रमुख उत्सर्जी अंग है।
- वृक्क के दो कार्य-
(i) रक्त से अपशिष्ट पदार्थों जैसे अमोनिया, यूरिया, यूरिक अम्ल आदि को छानकर मूत्र का निर्माण करता है।
(ii). शरीर में जल का संतुलन बनाए रखता है।
24. मानव मूत्र के अवयवों की प्रतिशत मात्रा क्या है ?
Ans- मानव मूत्र में साधारणतः जल, यूरिया तथा सोडियम क्लोराइड विद्यमान रहते है। मनुष्य के 24 घंटे के 80 से 100 ग्राम प्रोटीन आहार में जल 96% तथा ठोस 4% (जिसमें यूरिया 2% तथा अन्य पदार्थ 2% होता है) यूरिया की सामान्य मात्रा 100 mg माना जाता है। 1.5 से 2 ग्राम यूरिक अम्ल प्रतिदिन मूत्र के साथ उत्सर्जित होता है। मूत्र का पीला रंग इसमें उपस्थिति यूरोक्रोम रंजक की उपस्थिति के कारण होता है।
25. प्रतिवर्ती क्रिया क्या है ? प्रतिवर्ती क्रिया में मस्तिष्क की क्या भूमिका है ?
Ans- प्रतिवर्ती क्रिया मस्तिष्क के इच्छा के बिना होनेवाली अनैच्छिक क्रिया है। यह स्वायत्त प्रेरक का प्रयुत्तर है। यह बहुत स्पष्ट और यांत्रिक प्रकार की होती है। जैसे- खाँसना, छींकना प्रतिवर्ती क्रियाएँ मस्तिष्क के द्वारा परिचालित नहीं होती, ये मेरुरज्जु के द्वारा नियंत्रित पेशियों की अनैच्छिक क्रियाएँ होती हैं, जो प्रेरक के प्रत्युत्तर में होती है, ये क्रियाएँ यद्यपि मस्तिष्क के इच्छा के बिना होती है पर मस्तिष्क तक इसकी सूचना पहुँचती है जहाँ सोचने-विचारने की प्रक्रिया होती है।
26. DNA का विस्तृत नाम लिखें। DNA की प्रतिकृति बना जनन के लिए आवश्यक है। क्यों ?
Ans- DNA का पूरा नाम – Deoxyribose Nucleic Acid है।
जनन की प्रक्रिया में वैसी ही समरूप संतान की प्राप्ति की जाती है, जैसे जनक होते हैं। DNA की प्रतिकृति के परिणामस्वरूप ही वंशानुगत गुणों से युक्त संतान प्राप्त होती है। इसलिए DNA की प्रतिकृति बनना जनन के लिए आवश्यक है।
27. पारितंत्र में अपमर्जकों की क्या भूमिका है ?
Ans- पारितंत्र में अपमार्जक (अपघटक) अति महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अपमार्जक (जीवाणु एवं कवक) मृत जैव अवषेश का अपमार्जन करते है। ये मृत पादप एवं जंतु शरीरों का अपने भोजन के लिए उपयोग करते हैं। अपमार्जक जटिल कार्बनिक पदार्थों का अपघटन कर उसे सरल कार्बनिक पदार्थों में परिवर्तित कर मृदा में प्रतिस्थापित कर देते हैं, जिससे मृदा पोषक तत्त्वों से समृद्ध होकर अपेक्षाकृत अधिक उर्वरा हो जाती है। इस प्रकार अपमार्जक पर्यावरण को स्वच्छ एवं साफ रखते हैं और पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाते हैं।
28. मानव में शिशुओं का लिंग निर्धारण किस प्रकार होता है ?
Ans- नर युग्मक (2A + XY) विषम युग्मनजी होता है और दो प्रकार के नर युग्मक उत्पन्न करता hat B – A + X और A + Y शुक्राणु।
मादा मनुष्य (2A + XX) समयुग्मनजी होता है और केवल एक प्रकार के मादा युग्मक (अंडाणु) उत्पन्न करता है – A + X अण्डाणु।
(i) यदि A + X शुक्राणु, मादा युग्मक अण्डाणु (A + X) से निषेचित करता है तो 2A + XX जाइगोट बनता है जो परिवर्द्धित होकर लड़की को जन्म देगी।
(ii) यदि A + Y शुक्राणु, A + X अण्डाणु के साथ निषेचित होता है, तो 2A + XY जाइगोट बनेगा जो परिवर्द्धित होकर लड़का को जन्म देगा।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न संख्या 29 एवं 30 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न है। इनमें से किन्ही एक का उत्तर दें।
29. पुष्पी पौधों में निषेचन की प्रक्रिया का सचित्र वर्णन करें।
Ans- परागण की क्रिया द्वारा परागकण स्त्रीकेसर के वार्तिकाग्र तक पहुँचता है। परागकण वर्तिकाम द्वारा स्स्रावित तरल पदार्थ को अवशोषित कर फूल जाता है। परागकण का बाह्यचोल फूल कर फट जाता है और अन्तः चोल अंकुरित होकर बाह्य चोल में अवस्थित जनन छिद्र (germ pore) द्वारा एक नलिका के रूप में बाहर आता है, जिसे परागनली कहते हैं, परागनली वर्तिकाग्र और वर्तिका के ऊतकों को भेदती हुई बीजांड तक पहुँच जाती है। परागनली के शीर्ष पर नलिका केन्द्रक होते हैं जो परागनली को बीजांड तक पहुँचने का मार्ग प्रशस्त करते हैं, परागनली में जनन केन्द्रक (n) समसूत्री कोशिका विभाजन द्वारा दो नर युग्मक (n) बनाता है।
बीजांड तक पहुँचने के बाद परागनली बीजांडद्वार द्वारा बीजांड के भीतर भ्रूणकोष तक पहुँच जाता है। परागनली के शीर्ष पर मौजूद नलिका केन्द्र नष्ट हो जाता है जिसे परागनली खुल जाती है। दोनों नर युग्मक भ्रूणकोष के भीतर पहुँच जाते हैं।
एक नरयुग्मक (n) भ्रुणकोष में मौजूद मादा युग्मक अंडकोशिका (n) के साथ निषेचित होता है और जाइगोट बनाता है। इस क्रिया को सिनगेमी कहते हैं।
जबकि दूसरा नर युग्मक (n) भ्रूणकोष में मौजूद निर्दिष्ट केन्द्रक (2n) के साथ संयुग्मित होकर प्राथमिक भ्रूणकोष केन्द्रक (3n) बनाता है। निषेचन की इस प्रक्रिया को त्रिसंलयन कहते हैं।

चूँकि दो प्रकार का जनन सिनगेमी और त्रिसंलयन एक साथ एक भ्रूणकोष में संपन्न होता है, इसलिए इसे दोहरा निषेचण कहते हैं। निषेचण के पश्चात् अंडाशय फल में तथा बीजांड बीज में परिवर्द्धित होता है।
30. दोहरा परिसंचरण किसे कहते हैं ? मनुष्य में दोहरे परिसंचरण की प्रक्रिया किस प्रकार होती है यह क्यों आवश्यक है ?
Ans- दोहरा परिसंचरण-एक परिसंचरण पूरा करने के लिए रक्त को हृदय का दो चक्कर लगाना पड़ता है, इसलिए इसे दोहरा परिसंचरण कहते हैं। दोहरा परिसंचरण निम्नांकित दो चरणों में पूरा होता है-
(i) फुफ्फुसीय परिसंचरण – यह परिसंचरण मानव हृदय के दाहिना निलय से आरंभ होता है, और फेफड़ा होता हुआ बायाँ आलिंद में समाप्त होता है। यह प्रक्रम इस प्रकार होता है।

(ii) दैहिक परिसंचरण – यह परिसंचरण हृदय के बायाँ निलय से आरंभ होता है और शरीर के विभिन्न ऊतकों से होता हुआ हृदय के दायाँ आलिंद में समाप्त होता है।

मानव में दोहरे रक्त परिसंचरण की खोज अंग्रेज वैज्ञानिक विलियम हार्वे ने की।
महत्व – दोहरे परिसंचरण के कारण शरीर को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन प्राप्त हो जाती है। उचित ऊर्जा की प्राप्ति होती है, जिससे शरीर का उचित तापमान बना रहता है।

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