Class 10th Physics Chapter 2 – Manav Netra Tatha Rang Biranga Sansar

 Class 10th Physics Chapter 2 - Manav Netra Tatha Rang Biranga Sansar

 Class 10th Physics Chapter 2 – Manav Netra Tatha Rang Biranga Sansar

Subject Science - विज्ञान | Physics - भौतिकी
Class 10
Chapter 2 ( मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार )
Session2024-26
Subjective QuestionAll Most VVI Questions

2. मानव नेत्र तथा रंग बिरंगा संसार | By – Suraj Sir

यदि आप मैट्रिक फाइनल बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो यह पोस्ट आपके लिए है। यदि आप चैप्टर 2 में सिर्फ इतना क्वेश्चन आंसर कर लेते हैं तो आपको फाइनल बोर्ड परीक्षा में एक भी प्रश्न इस चैप्टर से नहीं छूटेगा इसकी फुल गारंटी है तो इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढ़ें और एक-एक प्रश्न को कमांड कर ले ।

1. किसी बिंब को देखने के लिए नेत्र का सामंजन किस प्रकार किया जाता है? VVI

Ans अभिनेत्र लेंस की वक्रता में कुछ सीमाओं तक पक्ष्माभी पेशियों द्वारा रूपान्तरित किया जा सकता है। जब पेशियाँ शिथिल होती हैं तो अभिनेत्र लेंस पतला हो जाता है। ऐसी दशा में फोकस दूरी बढ़ जाती है। अतः दूर रखी वस्तुओं को देखने में समर्थ होते हैं। जब हम पास की वस्तुओं को देखते हैं तो पक्ष्माभी पेशियाँ सिकुड़ जाती हैं। अभिनेत्र लेंस की फोकस दूरी घट जाती है। इससे निकट रखी वस्तु को स्पष्ट देख पाते हैं।

2. मानव नेत्र में कौन-सा गुण है, जिससे सिनेमा के पर्दे पर चलते हुए तस्वीर को देखते हैं?

Ans जब हम किसी वस्तु को देखते हैं तो उसकी तस्वीर हमारे मानस पटल पर 1/10 सेकेण्ड तक छायी रहती है। इसके पश्चात् कोई दूसरा तस्वीर सामने आता है तो यह चलती हुइ प्रतीत होती है।

3. दोनों नेत्रों से रेटिना पर बना प्रतिबिम्ब थोड़ा भिन्न होता है फिर भी हम एक ही प्रतिबिम्ब को देखते हैं, क्यों?

Ans हमारा मस्तिष्क दोनों प्रतिबिम्बों का समायोजन करके एक प्रतिबिम्ब में परिवर्तित कर देता है , जिससे हम दोनों भिन्न प्रतिबिम्बों को एक ही प्रतिविम्व के रूप में देखते हैं।

4. आँखों की सुग्राहिता का क्या अर्थ है?

Ans मद्धिम प्रकाश में भी वस्तु को देखने वाली आँख को सुग्राही आँख कहा जाता है। यह गुण सुग्राहिता कहलाती है।

5. हम किसी वस्तु को जैसा है वैसा ही क्यों देख पाते हैं?

Ans सिग्नल दृक्-तंत्रिकाओं द्वारा प्रतिविम्ब मस्तिष्क तक पहुँच जाती है तथा मस्तिष्क इन सिग्नलों की व्याख्या करता है। अंततः इस सूचना को संशोधित कर मस्तिष्क किसी वस्तु को जैसा है वैसा ही दिखा देता है।

6. शिकार करने वाले जन्तुओं के नेत्र विपरीत दिशाओं में स्थित क्यों होते हैं?

Ans दोनों नेत्रों के विपरीत दिशा में रहने पर दृष्टिक्षेत्र बढ़ जाता है। ऐसी दशा में वह किसी शिकारी से बचता है और अन्य शिकार को पकड़ने में भी उसे मदद मिलती है।

7. दृष्टिदोष क्या है? यह कितने प्रकार का होता है? VVI

Ans नेत्र धीरे-धीरे अपनी समंजन क्षमता खो देता है । ऐसी स्थितियों में व्यक्ति वस्तुओं को आराम से सुस्पष्ट नहीं देख पाते। नेत्र में इन दोषों के कारण दृष्टि धुंधली हो जाती है। इसे ही दृष्टि दोष कहा जाता है।

  • यह मुख्यतःतीन प्रकार के होते हैं

(i) निकट दृष्टि
(ii) दीर्घ दृष्टि तथा
(iii) जरा दूरदृष्टिता

8. निकट दृष्टि दोष और दूर दृष्टि दोष में किन्हीं तीन अंतरों को लिखें।

Ans (i) दूर दृष्टि दोष वाला व्यक्ति दूर की चीजों को स्पष्ट देखता है जबकि निकट दृष्टि दोष वाला व्यक्ति दूर की वस्तुओं को नहीं देख पाता है।

(ii) दूर दृष्टि दोष वाला व्यक्ति नजदीक की वस्तुओं को स्पष्ट नहीं देख पाता है जबकि निकट-दृष्टि दोष वाला व्यक्ति आसानी से स्पष्ट देख पाता है।

(iii) दूर दृष्टि दोष के निवारण में चश्मे में उत्तल लेंस का प्रयोग किया जाता है जबकि निकट दृष्टि दोष वाले के निवारण हेतु चश्मे में अवतल लेंस का उपयोग होता है।

9. दूर-दृष्टि दोष वाला व्यक्ति आकाश में देखते समय चश्मा उतारना पसंद करता है। क्यों?

Ans दूर-दृष्टि दोष वाला व्यक्ति दूर की चीजों को आसानी से देख पाता है। अतः वह चश्मा उतारकर ही दूर की वस्तुओं को आसानी से देख पाता है। यही – कारण है कि दूर-दृष्टि दोष वाला व्यक्ति आकाश की ओर देखने पर अपना चश्मा उतार देता है।

10. जरा-दूरदृष्टिता क्या है?

Ans आयु में वृद्धि होने के साथ-साथ मानव नेत्र की समंजन-क्षमता घट जाती है। अधिकांश व्यक्तियों का निकट बिंदु दूर हट जाता है। संशोधक चश्मों के बिना उन्हें पास की वस्तुओं को आराम से देखने में कठिनाई होती है। इस दोष को जरा दूर-दृष्टिता कहा जाता है।

  • कारण :- यह दोष पक्ष्माभी पेशियों के धीरे-धीरे दुर्बल होने तथा क्रिस्टलीय लेंस के लचीलेपन में कमी आने के कारण उत्पन्न होता है।
  • निवारण :- कभी-कभी नेत्र में दोनों प्रकार के दोष उत्पन्न हो जाते हैं जिन्हें द्विफोकसी लेंसों की सहायता से दूर किया जाता है।

11. नेत्रदान करने वाले व्यक्तियों की सूची बनावें।

Ans  नेत्रदान करने वाले बच्चों की सूची इस प्रकार है

(i) वैसे व्यक्ति नेत्रदान कर सकते हैं जो किसी भी लिंग या उम्र के हों। मोतियाबिंद का आपरेशन वाले व्यक्ति भी नेत्रदान कर सकते हैं।

(ii) उच्च रक्त चाप वाले व्यक्ति, मधुमेह का रोगी, दमे का रोगी जिन्हें कोई – संक्रामक रोग नहीं है नेत्रदान कर सकते हैं।

नोट:- एड्स, हेपटाइटिस-B, टेटनस, हैजा से मरने वाले व्यक्ति ही नेत्रदान नहीं कर सकते हैं।

12. जरादूरदर्शित तथा दीर्घ दृष्टि दोष में अंतर स्पष्ट कीजिए।

Ans – जरा दृष्टि दोष

जरादृष्टि दोष को दूर करने के लिए चश्मे में द्विफोकसी लेंस का उपयोग किया जाता है।

चश्मे के ऊपरी भाग में अवतल लेंस और इसी चश्मे के नीचले भाग में उत्तल लेंस लगाया जाता है।

इससे जरादृष्टि दोष वाला व्यक्ति दूर की वस्तुओं को और नजदीक की वस्तुओं को आसानी से देख पाता है।

दूर दृष्टि दोष

दूर दृष्टि दोष वाला व्यक्ति दूर की वस्तुओं को देख पाता है लेकिन नजदीक की वस्तुओं को देखने में कठिनाई होती है।

इस दोष वाले व्यक्ति के चश्में में उत्तल लेंस लगाया जाता है।

13. जब हम नेत्र से किसी वस्तु की दूरी बढ़ा देते हैं तो नेत्र से प्रतिबिम्ब की दूरी को क्या होता है?

Ans नेत्र से वस्तु की दूरी बढ़ा देने पर भी आँख अपने समंजन शक्ति के द्वारा प्रतिबम्ब को रेटिना पर बनाता है। यह स्वस्थ आँख के लिए सम्भव है। नेत्र और रेटिना के बीच की दूरी सदा स्थिर रहती है। दृष्टि परास 10 सेमी० से अनंत बिन्दु तक होती है। इस परास पर कहीं भी वस्तु को रखा जाए तो प्रतिबिम्ब रेटिना पर ही बनेगा।

14. मोतियाबिंद क्या है?

Ans बढ़ती उम्र के कारण कुछ व्यक्तियों के नेत्र का क्रिस्टलीय लेंस धुंधला तथा दुधिया हो जाता है। इसके चलते नेत्र से किसी वस्तु को देखना आसान नहीं होता है। इसे मोतियाबिंद कहा जाता है।

  • इस दोष को शल्य चिकित्सा से दूर किया जाता है।

15. दूर दृष्टि दोष क्या है?

Ans दीर्घ दृष्टि दोष युक्त व्यक्ति दूर की वस्तुओं को स्पष्ट देख पाता है. लेकिन निकट की वस्तुओं को सुस्पष्ट नहीं देख पाता है।

16. मानव आँख में दृष्टि दोष क्या है? यह कितने प्रकार के होते हैं?

Ans सामान्य नेत्र द्वारा 25 सेमी० पर की वस्तु को स्पष्ट देखा जाता है। जब इस स्पष्ट दर्शन की न्यूनतम दूरी पर वस्तु को स्पष्ट नहीं देख पाता है तो कहा जाता है कि नेत्र में दृष्टिदोष है।

  • यह मुख्यतः चार प्रकार का होता है

(i) लघु दृष्टिदोष
(ii) दीर्घ दृष्टिदोष
(iii) जरा दृष्टिदोष
(iv) अबिंदुकता

17. सामान्य नेत्र 25 सेमी से निकट रखी वस्तुओं को सुस्पष्ट क्यों नहीं देख पाते?

Ans 25 सेमी की दूरी पर रखी वस्तुओं को आँख स्पष्ट रूप से देखता है लेकिन 25 सेमी से कम निकट रखी वस्तुओं का प्रतिबिम्ब दृष्टि पटल पर स्पष्ट रूप से नहीं बनता है। अतः मानव वस्तुओं को स्पष्ट रूप से नहीं देख पाती है।

18. प्रिज्म से होकर प्रकाश के अपवर्तन का नामांकित किरण आरेख खींचें।

उत्तर-

 

19. प्रकाश वर्ण-पट क्या है?

Ans जब सूर्य का श्वेत प्रकाश किसी प्रिज्म से होकर गुजरता है, तो यह सात रंगों में विक्षेपित हो जाता है।

श्वेत प्रकाश का प्रिज्म द्वारा सात रंगों में विभक्त होना प्रकाश का विक्षेपण कहलाता है। ये सात रंग बैंगनी, नीला, आसमानी, हरा, पीला, नारंगी और लाल हैं। लाल वर्ण के किरणों का विचलन न्यूनतम और बैंगनी वर्ण के किरणों का विचलन महत्तम होता है। उन रंगों को एक पर्दा पर उतारा जाए तो पर्दा वर्णपट कहलाता है।

20. स्पेक्ट्रम क्या है ?

Ans जब श्वेत प्रकाश (सूर्य का प्रकाश) किसी प्रिज्म से होकर गुजरता है तो यह सात रंगों में विभाजित हो जाता है। प्रकाश के अवयवी वर्षों के इस पैटर्न को स्पेक्ट्रम कहते हैं।

21. स्पेक्ट्रम में किस रंग के प्रकाश का तरंगदैर्ध्य महत्तम और किस रंग के प्रकाश का तरंगदैर्ध्य न्यूनतम होता है।

Ans स्पेक्ट्रम में लाल रंग के प्रकाश का तरंगदैर्ध्य महत्तम होता है लेकिन बैंगनी रंग के प्रकाश का तरंगदैर्ध्य न्यूनतम होता है। अतः लाल रंग के प्रकाश का विचलन कम और बैंगनी रंग के प्रकाश का विचलन महत्तम होता है।

22. ‘टिंडल प्रभाव’ क्या है?

Ans जब किसी घने जंगल के वितान से सूर्य का प्रकाश गुजरता है तो टिंडल प्रभाव को देखा जाता है। जंगल के कुहासे में जल की सूक्ष्म बूँदें प्रकाश को प्रकीर्णन कर देती हैं।

23. तारे और ग्रहों में अंतर स्पष्ट करें।

Ans  तारे और गृह में निम्नलिखित अंतर है

  • तारे

(i) तारे आकाश में प्रकाश के बिन्दु स्रोत जैसा दीखते हैं।
(ii) तारे पृथ्वी से काफी दूर है।
(iii) तारे आकाश में टिमटिमाते नजर आते हैं।

  • ग्रह

(i) ग्रह ढेर सारे बिन्दुओं का स्रोत है।
(ii) ग्रह अपेक्षाकृत पृथ्वी के समीप है।
(iii)ग्रह नहीं टिमटिमाते हैं ।

24. किसी अंतरिक्ष यात्री को आकाश नीले की अपेक्षा काला क्यों प्रतीत होता है?

Ans अंतरिक्ष यात्री वायुमंडल के ऊपरी सतह पर गतिशील रहता है। इस ऊँचाई पर वायु के कण की अनुपस्थिति रहती है। सूर्य से निकलने वाले प्रकाश (नीला वर्ण) का प्रकीर्णन नहीं हो पाता है। इससे आकाश नीला नहीं दिखता है बल्कि अंतरिक्ष यात्री इसे काला देखता है।

25. सूर्योदय के समय सूर्य लाल क्यों प्रतीत होता है?

Ans सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य हमसे काफी दूर रहता है। इससे आने वाला प्रकाश वायुमंडल के मोटी परत से होकर दर्शक के नेत्र तक पहुँचता है। इसके रास्ते में पड़ने वाले वायुकणों से सूर्य प्रकाश के पथ के लम्बवत् नीले किरणों का अधिकतम भाग प्रकीर्णित हो जाता है और दर्शक को प्राप्त किरणों में से नीला रंग गायब रहता है। अतः दूर से आने वाले प्रकाश नीले रंग के गायब होने के कारण लाल दीखता है। अतः सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य लाल दीखता है।

26. रेलवे सिग्नल में लाल रंग का प्रयोग क्यों किया जाता है?

Ans लाल रंग का तरंगदैर्ध्य सब रंगों से अधिक होता है। अतः लाल रंग के प्रकाश का विचलन सबसे कम होता है। यही कारण है कि रेलवे सिग्नल का प्रकाश लाल रंग का होता है।

27. तारे क्यों टिमटिमाते हैं?

Ans ग्रह तारों की अपेक्षा हमारे बहुत समीप हैं। अतः इनसे इतना पर्याप्त प्रकाश मिलता है कि वायुमण्डलीय परतों के घनत्वों के अस्थायित्व के प्रभाव के चलते प्राप्त किरणों की संख्या में अपेक्षाकृत कम ही कमी आती है और वे लगभग स्थायी रूप में चमकते दिखते हैं। तारों से चलने वाले प्रकाश किरण वायुमण्डल के विभिन्न घनत्व वाले परतों से गुजरने पर किरणों के पथ में विचलन होता है और तारे का प्रकाश विभिन्न क्षणों में अपवर्तित होते हैं और टिमटिमाते नजर आते हैं।

28. प्रकीर्णित प्रकाश का वर्ण किस पर निर्भर करती है?

Ans यह प्रकीर्णन करने वाले कणों के साइज पर निर्भर करता है। अत्यंत सूक्ष्म कण मुख्य रूप से नीले प्रकाश को प्रकीर्ण करते हैं जबकि बड़े साइज के कण अधिक तरंगदैर्ध्य के प्रकाश को प्रकीर्ण करते हैं।

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